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डिस्ट्रीब्यूटर से दवा खरीदना: रेट, इनवॉइस, क्रेडिट और रिटर्न

मेडिकल स्टोर का मुनाफ़ा काउंटर जितना ही खरीद पर बनता है। ये आदतें रेट, स्टॉक और सप्लायर — तीनों सही रखती हैं।

5 मिनटअपडेट:

1. असली रेट जानिए

PTR GST से पहले का रेट है। ‘10 + 1 फ़्री’ जैसी स्कीम हर पैक का असली रेट घटाती है: जितना दिया उसे मिले हुए कुल पैक से भाग दीजिए।

  • PTR ₹80, 10 + 1 पर: ₹800 ÷ 11 = ₹72.73 एक पैक
  • सप्लायरों की तुलना असली रेट पर कीजिए, छपे हुए पर नहीं
  • स्कीम तभी बचत है जब पैक एक्सपायरी से पहले बिक जाएँ

2. माल आते ही इनवॉइस जाँचिए

साइन करने से पहले माल और इनवॉइस लाइन-लाइन मिलाइए।

  • प्रोडक्ट और पैक साइज़
  • बैच, एक्सपायरी और MRP
  • रेट, GST और फ़्री मात्रा
  • कम या टूटा माल इनवॉइस पर लिखवाइए

3. उसी दिन खरीद एंट्री

देर से एंट्री मतलब ऐसा स्टॉक जो बिल नहीं हो सकता और सप्लायर का गलत बैलेंस। उसी दिन बैच, एक्सपायरी और रैक के साथ एंट्री कीजिए — सप्लायर की बिल फ़ाइल पढ़ने से टाइपिंग बचती है।

4. क्रेडिट के दिन और भुगतान

हर सप्लायर के क्रेडिट के दिन लिखिए और समय पर भुगतान कीजिए; अच्छे भुगतान पर बेहतर स्कीम मिलती है। किसका कितना कब देना है, इसकी चलती सूची रखिए।

5. खरीदने से पहले रिटर्न की शर्तें तय कीजिए

हर सप्लायर से पूछिए कि एक्सपायरी के पास और टूटा माल कैसे वापस लेते हैं, और जवाब लिखकर रखिए। जो बिकता है उसके हिसाब से ऑर्डर कीजिए, ताकि कम पैक आपकी शेल्फ़ पर एक्सपायर हों।