गाइड

मेडिकल स्टोर का रोज़ का हिसाब: ऐसा तरीका जो हर रुपया ढूँढ ले

ज़्यादातर कैश का फ़र्क छोटी-छोटी बातों से आता है जो किसी ने लिखी नहीं। सुबह और रात दस मिनट का तरीका दराज़, उधार और सप्लायर — सब सीधा रखता है।

4 मिनटअपडेट:

1. ओपनिंग कैश से शुरू कीजिए

पहले बिल से पहले दराज़ गिनिए और रकम लिखिए। रात की हर गिनती इसी से शुरू होती है।

2. हर बिक्री, कैसे पैसा आया

कैश, UPI, कार्ड और उधार चार अलग चीज़ें हैं। दराज़ में सिर्फ़ कैश जाता है; UPI और कार्ड बैंक में; उधार वह पैसा है जो अभी आना है।

  • हर बिल पर मोड लिखिए — या एक बिल दो मोड में बाँटिए
  • उधार किसी नाम वाले ग्राहक पर, कभी ‘फुटकर’ नहीं

3. दराज़ में आया और गया पैसा

वसूला गया उधार आता है; सप्लायर को कैश में दिया, चाय या डिलीवरी जैसे खर्च, और घर ले गया कैश बाहर जाता है। हर एक उसी समय कारण के साथ लिखिए।

4. गिनकर दिन बंद कीजिए

निकालिए दराज़ में कितना होना चाहिए, गिनिए कितना है, और फ़र्क कारण के साथ लिखिए। चुपचाप बराबर मत कीजिए।

  • होना चाहिए = ओपनिंग + कैश बिक्री + वसूली − बाहर गया कैश − खर्च
  • उदाहरण: ₹2,000 + ₹14,500 + ₹1,200 − ₹5,000 − ₹350 = ₹12,350
  • गिनती ₹12,300? ₹50 कम और क्यों — लिखिए

5. हफ़्ते में एक बार, महीने में एक बार

हर हफ़्ते देखिए किसका उधार बाकी है और सप्लायर का कितना देना है। हर महीने मुनाफ़ा देखिए: बिक्री, घटाकर बिकी दवा की लागत, घटाकर खर्च।

टैक्स के लिए कौन से रिकॉर्ड रखने ज़रूरी हैं, यह आपका CA बताएगा।