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दवाइयों पर GST: रेट, HSN कोड और MRP पर बिल

दवाइयाँ MRP पर बिकती हैं, और MRP में GST पहले से शामिल है। मेडिकल स्टोर के बिल पर रेट, HSN कोड और कीमत के अंदर का टैक्स कैसे जुड़ते हैं, यहाँ देखिए।

5 मिनटअपडेट:

रेट: हमेशा सप्लायर के इनवॉइस से

22 सितंबर 2025 से ज़्यादातर दवाइयों पर 5% GST है, और जीवनरक्षक दवाइयों की एक लिस्ट पर शून्य। फ़ार्मेसी में बिकने वाले कुछ सामान — कॉस्मेटिक, डिवाइस, खाने-पीने की चीज़ें — पर दूसरे रेट हैं।

सबसे सुरक्षित नियम: हर प्रोडक्ट का रेट सप्लायर के इनवॉइस से लीजिए और बिलिंग सॉफ़्टवेयर में एक बार डाल दीजिए, ताकि हर बिल पर वही रेट लगे।

बिल पर HSN कोड

दवाइयाँ HSN अध्याय 30 में आती हैं (जैसे खुराक वाली दवाइयों के लिए 3004)। कितने अंक छापने हैं, यह टर्नओवर पर निर्भर है:

  • ₹5 करोड़ तक टर्नओवर: रजिस्टर्ड ख़रीदार (B2B) के बिल पर 4 अंक का HSN
  • ₹5 करोड़ से ज़्यादा: हर बिल पर 6 अंक का HSN
  • HSN सप्लायर के इनवॉइस से लीजिए

MRP के अंदर टैक्स का हिसाब

MRP में GST शामिल है, इसलिए टैक्सेबल वैल्यू = MRP ÷ (1 + रेट)। बाकी टैक्स है, जो अपने राज्य में बिक्री पर CGST और SGST में बराबर बँटता है।

उदाहरण: ₹105 MRP का पत्ता, 5% GST — टैक्सेबल वैल्यू ₹100 और टैक्स ₹5 — ₹2.50 CGST और ₹2.50 SGST। डिस्काउंट पहले कीमत से घटता है, फिर ग्राहक जो देता है उस पर टैक्स निकलता है।

B2B बिल और महीने का रिटर्न

जब क्लिनिक, नर्सिंग होम या GSTIN वाली दूसरी दुकान को बेचें, तो बिल पर उनका GSTIN डालिए — यह B2B में अलग दिखता है। महीने के अंत में CA को HSN-वार बिक्री, B2B बिल, रेट-वार टैक्स और सप्लायर के GSTIN के साथ खरीद चाहिए।

कंपोज़िशन स्कीम

छोटा रिटेलर कंपोज़िशन स्कीम भी चुन सकता है: टर्नओवर पर तय कम टैक्स, ग्राहक से टैक्स नहीं लिया जाता और टैक्स इनवॉइस की जगह बिल ऑफ़ सप्लाई, लेकिन खरीद पर इनपुट क्रेडिट नहीं। टर्नओवर की सीमा और नियम GST काउंसिल तय करती है — आपकी दुकान के लिए सही है या नहीं, CA से पूछिए।

GST के रेट और नियम बदलते रहते हैं। हर प्रोडक्ट का मौजूदा रेट और अपनी रिटर्न की ज़िम्मेदारी CA से पक्की कीजिए।